बचपन कहीं खो गया रे -A poem by Mrs. Rachna Khushu.

RACHNA KHUSHU Dated:26.08.2021.  बचपन कहीं खो गया रे                                          वो कोमल, कच्चा, सच्चा बचपन वो अल्हड,चंचल, निश्छल बचपन कुम्हला गया है,कहीं खो गया है उसे कैसे वापिस लायें कैसे उसका नूतन श्रींगार करें ऐक गति …

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